
इंदौर। नगर निगम ने 5 साल में 26 लाख पौधे लगाने का दावा किया है। लेकिन, शहर में ऐसा कुछ नजर नहीं आ रहा। निगम के ही आंकड़े बताते हैं कि शहर का ग्रीन इंडेक्स 13% के आसपास बना हुआ है। शहर के 30 वार्ड ऐसे हैं, जहां ग्रीन बेल्ट 3 से 6 किमी तक सिमटा है।
इंदौर स्वच्छता में नंबर वन है, लेकिन हरियाली में हम कई शहरों से पीछे है। शहर के क्षेत्रफल का सिर्फ 9 प्रतिशत हिस्सा ही हरा भरा है, जबकि दिल्ली में 19 और सूरत में 25 प्रतिशत ग्रीन बेल्ट है। सूरत ने 20 सालों में ग्रीन बेल्ट को दोगुना किया है। अब नगर निगम भी चार साल में इंदौर का ग्रीन बेल्ट 18 प्रतिशत तक करना चाहता है। इसके लिए हर साल बड़े पैमाने पर पौधे लगाए जाएंगे। शहर के एक तिहाई वार्डों में हरियाली 6 किमी से भी कम है। चौंकाने वाली बात यह है कि वार्ड क्रमांक 2, 61, 68 और 75 ऐसे हैं, जहां एक भी विकसित बगीचा नहीं है।
जमीन पर हरियाली नहीं
वहीं, वार्ड 11, 20, 24 और 28 में सिर्फ दो-दो बगीचे हैं। इससे साफ है कि पौधारोपण के बड़े-बड़े आंकड़े जमीन पर हरियाली नहीं ला सके। जोन नंबर 2, 14, 15 और 20 में सिर्फ 3 किमी का ग्रीन बेल्ट है। निगम के रिकॉर्ड के मुताबिक शहर में कुल 1063 विकसित उद्यान हैं, लेकिन इनका वितरण असमान है। दस्तावेजों में दर्ज है कि शहर में 94 किमी क्षेत्र ग्रीन बेल्ट के दायरे में आता है, लेकिन वार्ड स्तर पर तस्वीर इससे बिलकुल अलग है। कई वार्डों में ग्रीन स्पेस नाम मात्र का है। इनमें से जोन नंबर 2, 14, 15 और 20 में सिर्फ 3 किमी का ग्रीन बेल्ट है। वहीं जोन 3, 4, 10 और 16 में 6 किमी का ग्रीन बेल्ट है।
सबसे ज्यादा हरियाली इस वार्ड में
जोन क्रमांक-7 में आने वाले वार्ड 29, 32, 33 और 34 में 119 से ज्यादा विकसित बगीचे हैं। यहां 35 कम्पोस्ट पिट और 109 कर्मचारियों की तैनाती दर्ज है। इन्हीं में से एक वार्ड विभाग प्रभारी एमआईसी सदस्य का भी है। बिजासन टेकरी, रेवती रेंज, ट्रेंचिंग ग्राउंड, सिटी फॉरेस्ट (बिचौली हप्सी) और पितृ पर्वत सहित आश्रम जैसे बड़े वृक्षारोपण क्षेत्रों में क्रमशः 27, 95, 18, 21 और 52 कर्मचारी ड्यूटी कर रहे हैं, क्योंकि यह शहर के बड़े बगीचे है। शहर में कुल 93.57 किलोमीटर लंबी ग्रीन बेल्ट की देखरेख की जिम्मेदारी महज 222 कर्मचारियों पर है। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी लंबी ग्रीन बेल्ट के लिए यह संख्या बेहद कम है, जिसका असर पौधों की देखभाल और सर्वाइवल रेट पर पड़ रहा है।