
नईदिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर कहा है कि ईरान के साथ किसी तरह की बातचीत या समझौता तभी संभव है, जब वह बिना किसी शर्त के आत्मसमर्पण करे। ट्रंप के इस बयान को मौजूदा तनावपूर्ण हालात के बीच बेहद अहम माना जा रहा है। क्योंकि, मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष ने पहले ही अंतरराष्ट्रीय राजनीति को गर्मा दिया है। ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि ईरान में एक नए और स्वीकार्य नेतृत्व का उभरना बेहद जरूरी है। उनका मानना है कि मौजूदा व्यवस्था देश को गलत दिशा में ले जा रही है। उन्होंने संकेत दिया कि जब ईरान में नया नेतृत्व सामने आएगा, तब अमेरिका और उसके सहयोगी देश मिलकर वहां स्थिरता और विकास की दिशा में काम कर सकते हैं।
ट्रंप ने कहा कि यदि परिस्थितियां बदलती हैं तो अमेरिका और उसके साझेदार देश ईरान को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में मदद करेंगे। उनके अनुसार अंतरराष्ट्रीय सहयोग से ईरान को मौजूदा संकट और विनाश की स्थिति से बाहर निकाला जा सकता है और देश को पहले से अधिक मजबूत अर्थव्यवस्था की ओर ले जाया जा सकता है। अपने संदेश के अंत में ट्रंप ने मेक ईरान ग्रेट अगेन का नारा भी दिया। उन्होंने कहा कि सही नेतृत्व और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के साथ ईरान का भविष्य उज्ज्वल हो सकता है। ट्रंप ने इस मुद्दे पर ध्यान देने के लिए लोगों का धन्यवाद भी किया और संकेत दिया कि आने वाले समय में इस विषय पर और सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।
ईरान ने कहा, कुछ देश मध्यस्थता की कोशिश में लगे
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने कहा है कि कुछ देशों ने मौजूदा क्षेत्रीय तनाव को खत्म करने के लिए मध्यस्थता की कोशिशें शुरू की हैं। उन्होंने कहा कि ईरान क्षेत्र में स्थायी शांति के लिए प्रतिबद्ध है। पजशकियान ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि कुछ देशों ने संघर्ष को कम करने के लिए मध्यस्थता के प्रयास शुरू किए हैं, हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि इन कोशिशों में कौन-कौन से देश शामिल हैं। उन्होंने कहा कि मध्यस्थता के प्रयासों में उन देशों को भी शामिल करना चाहिए जिन्होंने ईरानी लोगों को कमतर आंका और इस संघर्ष को भड़काया। पजशकियान का यह बयान अमेरिका और इजराइल की ओर इशारा माना जा रहा है।
हिजबुल्लाह ने आधी रात से इजराइल पर रॉकेट दागे
इजराइल ने दावा किया है कि हिजबुल्लाह ने आधी रात के बाद से उसकी ओर करीब 70 रॉकेट दागे हैं। इजराइली सेना के मुताबिक इनमें से कई रॉकेट दक्षिणी लेबनान से लॉन्च किए गए। इजराइल का दावा है कि इस सप्ताह लेबनान में शुरू किए गए हमलों के बाद उसकी सेना ने पूरे देश में 500 से ज्यादा ठिकानों को निशाना बनाया है और 70 हिजबुल्लाह लड़ाकों को मार गिराया है। वहीं लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक सोमवार से इजराइली हमलों में अब तक 217 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें कई नागरिक शामिल हैं।
खाड़ी देश अमेरिका को बता रहे कसूरवार
मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष तेज है। इस युद्ध का सबसे ज्यादा असर खाड़ी देशों जैसे सऊदी अरब, यूएई, कुवैत और बहरीन पर पड़ रहा है। रिपोटों के अनुसार, युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान ने करीब 380 मिसाइलें और करीब 1,480 ड्रोन दागे हैं। इन हमलों में कम से कम 13 लोगों की मौत हुई है और तेल ठिकानों सहित कई जगहों पर भारी नुकसान हुआ है। हालांकि इन हमलों का सीधा कारण ईरान है, फिर भी कई खाड़ी देश इसके लिए अमेरिका को जिम्मेदार मान रहे हैं। उनका आरोप है कि अमेरिका ने अपने सैन्य अभियानों की पहले से कोई स्पष्ट जानकारी उन्हें नहीं दी।
