
भोपाल। प्रदेश भाजपा में हेमंत खंडेलवाल की प्रदेश अध्यक्ष पद पर नियुक्ति के बाद से 62 जिलों में नई कार्यकारिणियों के गठन की प्रक्रिया शुरू हो गई। लेकिन, विडंबना यह है कि नेताओं की खींचतान के कारण एक दर्जन से अधिक जिलों में अभी तक कार्य समितियों का गठन नहीं हो पाया। जिला अध्यक्षों के सामने टीम चयन को लेकर बड़ी चुनौती खड़ी है। पुराने कार्यकर्ताओं, नए शामिल हुए नेताओं और दूसरे दलों से आए नेताओं को शामिल करने की कोशिश में संतुलन साधना जरूरी हो गया है।
कांग्रेस से आए लोगों से नाराजी
जिला स्तर की टीमों में पुराने समर्पित कार्यकर्ताओं के साथ साथ नए और चुनाव से पहले भाजपा में आए नेताओं को भी जगह देने की मांग उठ रही है। पार्टी के पद जैसे उपाध्यक्ष, महामंत्री, मंत्री सहित मोर्चा व प्रकोष्ठों में शामिल होने के लिए कई नेता पैरवी में लगे हैं। पिछले दो वर्षों में लगभग ढाई लाख कार्यकर्ता विभिन्न दलों से भाजपा में शामिल हुए हैं। इनमें से अधिकांश कांग्रेस पृष्ठभूमि से हैं। इन नेताओं में सरपंच से लेकर पूर्व विधायक व मंत्री तक शामिल हैं। वे अब जिला संगठन में अपनी
भूमिका की अपेक्षा कर रहे हैं।
टीम न बनने से बड़े नेता नाराज कई जिलों में भाजपा की टीम गठित नहीं होने की वजह से शीर्ष नेतृत्व नाराज है। उन्होंने जल्द ही सूची जारी करने के निर्देश दिए। लेकिन, संबंधित जिला अध्यक्षों के सामने सबसे बड़ी चुनौती बड़े नेता, विधायक और सांसद हैं, जिनमें खींचतान की वजह से जिला कार्यकारिणी की घोषणा नहीं हो पा रही है। मध्यप्रदेश भाजपा के एक दर्जन से ज्यादा ऐसे जिले हैं, जहां संगठन अध्यक्ष की नियुक्ति होने के छह से आठ माह के बाद भी जिले की टीम गठित नहीं हो पा रही है। जानकारों का कहना है कि इन जिलों में पार्टी के कद्दावर नेता, सरकार के मंत्री व अन्य वरिष्ठ नेता जिले की टीम में अपने-अपने समर्थकों को शामिल करना चाहते हैं, जिसकी वजह से जिलाध्यक्ष तय नहीं कर पा रहे हैं कि आखिर वे अपनी टीम में किन्हें शामिल करें।
नेताओं, मंत्रियों में सहमति नहीं
कहा जा रहा है कि कुछ जिलों में वरिष्ठ नेताओं और सरकार के मंत्रियों के बीच नामों पर सहमति नहीं बन पा रही है। सभी नेता अपने अपने समर्थक कार्यकर्ता को जिले की टीम में अहम पद दिलाना चाहते हैं। इसे लेकर नेताओं की भोपाल स्तर पर बैठक भी हो चुकी है, लेकिन जिलों में आपसी सामंजस्य नहीं बन पा रहा है। पिछले दिनों बनाए गए जिलों के प्रभारियों से कहा गया है कि वे अपने प्रभार के क्षेत्र में जाकर जिले की टीम गठित होने में आ रही अड़चनों को दूर करें।