
इंदौर। शहर के भागीरथपुरा इलाके में हुई दूषित जल त्रासदी से अभी तक 32 मौतें हो चुकी। इसके बाद भी दूषित जल से शहर को मुक्ति नहीं मिल रही। यह त्रासदी सिर्फ शहर तक सीमित नहीं है। इंदौर के अलावा महू, देपालपुर और सांवेर ब्लॉक में भी पेयजल प्रदूषित पाया गया। पानी के 566 सैंपलों की जांच में 51 फेल हुए।
लिए गए सैंपल से 9% जल स्रोत ऐसे हैं, जिनका पानी पीने योग्य नहीं मिला। देपालपुर की स्थिति सबसे खराब पाई गई। सैंपलों की जांच में सबसे ज्यादा दूषित पानी 32% देपालपुर ब्लॉक में मिला। सांवेर में 11.49%, महू में 5.77% और इंदौर ब्लॉक में यह 4.14% रहा। आंकड़ों के मुताबिक जिले में जो सर्वे हुआ है, उसमें 42 नल-जल योजनाएं बंद हैं। इसमें राऊ विधानसभा क्षेत्र में 4, सांवेर में 20, देपालपुर में 8, महू में 10 योजनाएं शामिल हैं।
पुरानी लाइनें सुधारेंगे
प्रदेश भर में स्वच्छ जल अभियान का पहला चरण चल रहा है जो 28 फरवरी तक चलेगा। इसमें सर्वे सहित जल स्रोत की पहचान करना है। 1 मार्च से दूसरा चरण शुरू होगा जो 31 मई तक चलेगा। एसओपी के तहत 20 साल से अधिक पुरानी लाइनों को चिह्नित कर 48 घंटे में लीकेज की मरम्मत करेंगे।
जल अभियान में इन पर ध्यान
भागीरथपुरा मामले के बाद 13 जनवरी से हर मंगलवार को जिले में जल-सुनवाई हो रही है। इसमें दूषित पानी सहित अन्य दिक्कतों की अब तक 1851 शिकायतें आई। तय किया गया कि जल आपूर्ति से संबंधित शिकायतों को इमरजेंसी कैटेगरी में रखना होगा। सीएम हेल्पलाइन में गंदे पानी तथा सीवेज की शिकायतों को तुरंत हल करेंगे। पीएचई की जल परीक्षण लैब से जल नमूनों का नियमित अंतराल पर परीक्षण होगा। शहरी क्षेत्रों में सुरक्षित एवं निर्बाध पेयजल आपूर्ति के लिए सर्वे किया जाएगा। वाटर ट्रीटमेंट प्लांट और ओवरहेड टैंक, संपवेल की सफाई 7 दिन के अंदर। बीआईएस 10500 में सीमा से अधिक प्रदूषण होने पर जलापूर्ति को रोकेंगे। साथ ही जल गुणवत्ता एवं जल जनित बीमारियों के संबंध में एडवाइजरी जारी होगी।