
हरदा। यहां के सिरकम्बा गांव की अर्चना नागर धाकड़ ने हिबिस्कस सबदरिफा फूल से प्राकृतिक एनर्जी ड्रिंक ‘बरगंडी बाग’ बनाकर कमाल कर दिया। यह इम्यूनिटी बूस्टर है और ‘गल्फूड 2026’ दुबई में इसे भारत सरकार ने लॉन्च किया। इसे APEDA से एक्सपोर्ट सर्टिफिकेट मिल चुका है। अभी इसका सालाना टर्नओवर 30 लाख है जिसके तेजी से बढ़ने की संभावना है। अर्चना ने इसके जरिए 200 आदिवासी महिलाओं को रोजगार दिया। उनका संघर्ष 2016 से जारी है। वे दो साल तक असफल होने के बाद सफल हुई और अब देश-विदेश में उनकी चर्चा है।
अर्चना का कहना है कि इस सफलता का श्रेय परिवार और सरकार को है, जिससे सहयोग मिला। अब उनके सपने पूरे होते दिख रहे हैं। झुंडगांव में उनके प्रोडक्ट की फैक्ट्री बन रही है। अर्चना ने अपनी मेहनत से ऐसा कमाल किया, जो ग्रामीण भारत की महिलाओं के लिए मिसाल बन गया। उन्होंने साउथ अफ्रीका के हिबिस्कस सबदरिफा (रोजेले) फूल को हरदा के खेतों में उगा लिया। इसके लिए दो साल मेहनत लगी। इस फूल की पंखुड़ियों से प्राकृतिक एनर्जी ड्रिंक ‘बरगंडी बाग’ तैयार किया है।
ड्रिंक को दुबई में लॉन्च किया
दरअसल, यह इम्यूनिटी बूस्टर के रूप में काम करता है और विटामिन-सी से भरपूर है। इसके लिए उन्हें भारत सरकार ने APEDA के तहत एक्सपोर्ट सर्टिफिकेट जारी किया और ड्रिंक को दुबई में गल्फूड 2026 (26-30 जनवरी) में लॉन्च किया। दुबई समेत विदेशों में सस्टेनेबल और वेलनेस प्रोडक्ट्स की डिमांड चरम पर है। पैकेजिंग में सिरकम्बा गांव का मैप और अरेबिक, फ्रेंच, इंग्लिश भाषाओं में विवरण शामिल कर अर्चना ने स्थानीय पहचान को वैश्विक स्तर पर प्रमोट किया है।
खेत से दुबई तक का सफर
वे प्रदेश की इकलौती ऐसी महिला किसान हैं, जिन्होंने खेत से दुबई तक का सफर तय किया और सालाना 30 लाख रुपए का टर्नओवर हासिल किया। 15 लाख के इन्वेस्टमेंट से शुरू यह बिजनेस अब झुंडगांव में फैक्ट्री के रूप में विस्तार ले रहा है। अर्चना इसका श्रेय सिंगल विंडो स्कीम को देती हैं। एक ग्रामीण बेटी ने जिद से किस्मत बदली, विदेशी फूल को स्थानीय बनाकर प्रोडक्ट तैयार किया और एक्सपोर्ट तक पहुंची, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महिला उद्यमिता का प्रमाण है।
केमिकल फ्री ड्रिंक
अर्चना की बिजनेस जर्नी 2016 से शुरू हुई थी, जब ऑस्ट्रेलियन फार्मर टीम हरदा आई और हिबिस्कस फूल की खेती सुझाई। विदेशी बीज को हरदा के माहौल में ढलने में दो साल असफलता मिली, लेकिन मां निर्मला के सहयोग और रिसर्च से सफलता मिली। कोविड में इम्यूनिटी की जरूरत देखकर फूलों से ड्रिंक बनाने का आइडिया आया। कई ट्रायल्स किए, किताबें पढ़ीं और 2022 में प्रोडक्ट लॉन्च किया।
इस ड्रिंक में कोई केमिकल नहीं, सिर्फ नैचुरल इंग्रीडिएंट्स जो विटामिन-सी से भरपूर हैं और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं। ये 10 रुपए से 500 रुपए तक की रेंज में उपलब्ध, ऑनलाइन, ऑफलाइन और सुपरमार्केट में बिक्री. गल्फूड 2026 में लॉन्च के बाद अंतरराष्ट्रीय डिमांड बढ़ी है, जहां वेलनेस बेवरेजेस का फोकस था। अर्चना 200+ आदिवासी महिलाओं को रोजगार दे रही हैं। परिवार का सपोर्ट अहम रहा, मां ने ‘बिजनेस ड्रीम’ बेटी पर साकार किया, पिता ने खेती की प्रेरणा दी।
महिला रोजगार सृजन
अर्चना ने 200 आदिवासी महिलाओं को रोजगार दिया है, जो फूल तोड़ने से लेकर पैकेजिंग तक काम करती हैं। हालांकि उनकी झुंडगांव में फैक्ट्री बन रही है। अर्चना की मां निर्मला ने हर कदम पर साथ दिया और अपने सपनों को बेटी पर साकार किया। अर्चना के पिता भी ‘टमाटर किंग’ हैं, जिन्होंने 2021 में लाखों का टमाटर बेच रिकॉर्ड बनाया था।
चुनौतियां और नवाचार
गांव में रहने वाली अर्चना कामर्स ग्रेजुएट और पॉलिटेक्निक पीजी हैं। उन्होंने पारंपरिक खेती छोड़कर 2016 में हिबिस्कस फूल की खेती शुरू की थी। उन्हें विदेशी बीज को हरदा के माहौल में एडाप्ट करने में दो साल लगे. कोविड में इम्यूनिटी फोकस से एनर्जी ड्रिंक का आइडिया मिला। रिसर्च, ट्रायल्स और 15 लाख इन्वेस्ट से बिजनेस शुरू किया। शुरुआती दिक्कतों के बाद अब वे 20 एकड़ में खेती कर रहीं हैं। उनका सालाना 30 लाख टर्नओवर के करीब है, जो अब कई गुना बढ़ सकता है।
