
अहमदाबाद। देश की पहली हाई-स्पीड रेल परियोजना (अहमदाबाद-मुंबई) तेजी से आकार ले रही है। हाल ही में इस प्रोजेक्ट ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की। अहमदाबाद जिले में अंडरग्राउंड मेट्रो टनल के ठीक ऊपर 100 मीटर लंबे ‘मेक इन इंडिया’ स्टील ब्रिज का निर्माण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया।यह केवल एक इंजीनियरिंग उपलब्धि नहीं है, बल्कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ की शक्ति का भी प्रतीक है।
यह स्टील ब्रिज इंजीनियरिंग का बेजोड़ नमूना है।
आमतौर पर बुलेट ट्रेन का वायाडक्ट 30 से 50 मीटर के स्पैन (खंभों के बीच की दूरी) का उपयोग करके बनाया जाता है। लेकिन, अहमदाबाद में कालूपुर और शाहपुर मेट्रो स्टेशनों के बीच स्थिति अलग थी। यहाँ बुलेट ट्रेन का मार्ग अंडरग्राउंड मेट्रो टनल के ऊपर से गुजरता है। मेट्रो टनल की सुरक्षा सुनिश्चित करने और उस पर बुलेट ट्रेन का अतिरिक्त भार न पड़े, इसके लिए इंजीनियरों ने एक विशेष रणनीति अपनाई।
– लंबा स्पैन : खंभों (नींव) को मेट्रो टनल से काफी दूर रखा गया, जिससे ब्रिज के स्पैन की लंबाई बढ़कर 100 मीटर हो गई।
– डिज़ाइन में बदलाव : सुरक्षा कारणों से यहाँ सामान्य वायाडक्ट के बजाय ‘स्टील ट्रस ब्रिज’ का उपयोग करने का निर्णय लिया गया।
– ब्रिज की तकनीकी विशेषताएं : यह विशालकाय ढांचा आधुनिक इंजीनियरिंग और मजबूती का संगम है।
– वजन और आयाम : 1,098 मीट्रिक टन वजन वाला यह ब्रिज 14 मीटर ऊंचा और 15.5 मीटर चौड़ा है।
वर्धा से बनाकर इसे यहां लाया गया
इसे बनाने में लगभग 45,186 हाई-स्ट्रेंथ (टीटीएचएस) बोल्ट का उपयोग किया गया। लंबी उम्र और जंग से बचाव के लिए इस पर ‘सी 5 सिस्टम’ प्रोटेक्टिव पेंटिंग की कोटिंग की गई है। इस पूरे स्ट्रक्चर को महाराष्ट्र के वर्धा स्थित वर्कशॉप में तैयार किया गया और ट्रेलरों के माध्यम से अहमदाबाद लाया गया। इसकी इंस्टॉलेशन प्रक्रिया भी बेहद चुनौतीपूर्ण रही। इस भारी-भरकम ब्रिज को स्थापित करना किसी चुनौती से कम नहीं था। इसे जमीन से 16.5 मीटर की ऊंचाई पर एक अस्थायी प्लेटफॉर्म बनाकर असेंबल किया गया। पूरी असेंबली के बाद, इसे बहुत ही सावधानी से नीचे लाकर स्थायी सपोर्ट सिस्टम पर फिट किया गया। यह पूरी प्रक्रिया स्ट्रक्चरल सटीकता और सुरक्षा के उच्चतम मानकों को ध्यान में रखकर पूरी की गई।
गुजरात में यह 13वां ब्रिज तैयार
यह ब्रिज पश्चिम रेलवे की अहमदाबाद-साबरमती मुख्य लाइन के समानांतर स्थित है। बुलेट ट्रेन परियोजना के तहत गुजरात में कुल 17 स्टील ब्रिज बनने हैं, जिनमें से यह 13वां ब्रिज है जो बनकर तैयार हो चुका है।
अहमदाबाद में इस स्टील ब्रिज का पूरा होना भारतीय रेलवे और नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड के लिए एक गौरवपूर्ण क्षण है। यह न केवल दो अत्याधुनिक परिवहन प्रणालियों (मेट्रो और बुलेट ट्रेन) के बीच बेहतर तालमेल को दर्शाता है, बल्कि यह भी सिद्ध करता है कि भारत अब जटिल बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को स्वदेशी तकनीक से पूरा करने में सक्षम है।