सूर्योदय से सूर्यास्त तक भोजशाला में अखंड हवन पूजन और दोपहर में नमाज हुई
प्रशासन ने नियत स्थान पर नमाज अदा करवाई, प्रशासन और पुलिस की चाकचौबंद व्यवस्था रही





धार। महाराजा भोज स्मृति उत्सव समिति के आह्वान पर धार की भोजशाला में मां वाग्देवी के मंदिर में बसंत पंचमी पर हिंदू समाज ने सूर्योदय से सूर्यास्त तक अखंड हवन पूजन किया। इसी के साथ भोजशाला में सूर्योदय के साथ ही हवन पूजन शुरू हुआ जो सूर्यास्त में संध्या आरती तक चला। ‘हिन्दू फ्रंट फार जस्टिस’ की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने बसंत पंचमी के एक दिन पूर्व स्पष्ट निर्देश दिया था कि हिन्दू समाज की पूजा भी भोजशाला में निर्विघ्न निश्चित स्थान पर पूरी हो और प्रशासन द्वारा निश्चित स्थान पर नमाज भी 1 बजे से 3 बजे तक अदा की जाए।
सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय से हिन्दू समाज का उत्साह दोगुना हुआ था। बसंत पंचमी पर भोजशाला में अखंड पूजन को लेकर सुबह से ही हिंदू समाज में अपार उत्साह और जोश था। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता हे कि महिला-पुरुष और बच्चे प्रातः 8 बजे से ही मा वाग्देवी सरस्वती के दर्शन पूजन के लिए लाइन में लगे दिखाई दिए। जैसे जैसे दिन चढ़ता गए, यह लाइन भी बढ़ती गई जो कई सो मीटर लंबी थी। लाइन भोजशाला प्रवेश द्वार से लेकर ज्योति मंदिर मोतीबाग चौक से अनाज मंडी गेट से बोहरा बाखल तक पहुंच गई। एक लाख से अधिक लोगों ने भोजशाला में मां वाग्देवी के दर्शन कर पूजन किया।
इसी के साथ पारंपरिक रूप से बसंत पंचमी पर निकले वाली शोभायात्रा भी ऐतिहासिक और भव्य से निकली सुबह 10 बजे से ही धार नगरवासी और आसपास के ग्रामीणजनों लालबाग में एकत्रित होना शुरू हो गए थे। जब 11 बजे लालबाग से शोभायात्रा निकल तो उसमें बच्चे वृद्ध और युवाओं की टोलियां देखते ही देखते हजारों की संख्या में हो गई 20 हजार से अधिक हिन्दू समाजजन शोभायात्रा में शामिल हुए। पुलिस की कड़ी सुरक्षा में यात्रा में बग्घी पर मां वाग्देवी सरस्वती का तेल चित्र विराजमान था। शोभायात्रा का अनेकों स्थानों पर विभिन्न समाज, सामाजिक संगठनों और व्यापारी संगठनों ने मंच लगा कर पुष्प वर्षा कर ऐतिहासिक शोभायात्रा का भव्य स्वागत किया।
भोजशाला पहुंचते ही शोभायात्रा धर्म सभा में परिवर्तित हो गई जहां मच पर मुख्य वक्त के रूप में विहिप के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार, अध्यक्षता कर रहे स्वदेशानंद गिरी महाराज, अवधूत संत नर्मदानंद जी महाराज, महामंडलेश्वर नृसिंहदास जी महाराज, भोजशाला आंदोलन के वरिष्ठ विमल गोधा सहित संत जन विराजमान थे।
2034 में भोजशाला भी मां वाग्देवी मंदिर
धर्म सभा को संबोधित करते हुए आलोक कुमार ने कहा जब ये मामला सुप्रीम कोर्ट में आया तो कोर्ट ने भी निर्णय दिया कि अब अखंड पूजन होगा । यहां की मां वाग्देवी सरस्वती की प्रतिमा लंदन के संग्रहालय में हे मां वाग्देवी को पुनः भोजशाला में स्थापित करना है भोजशाला के निर्माण ओर मां वाग्देवी के प्राणप्रतिष्ठा को 1 हजार साल पूरे होंगे और हम भी संकल्प लेते हे कि जैसे राम मंदिर का निर्माण हुए हैं वैसे ही सन 2034 भोजशाला के निर्माण के 1 हजार वर्ष पूरे होंगे तब तक भोजशाला भी मां वाग्देवी के मंदिर के रूप में विश्व में प्रतिष्ठित हो।
यह केवल मंदिर ही नहीं था यह ज्ञान प्राप्ति का गुरुकुल था। मौलाना कमालुद्दीन यहां रहे थे, पर बाद में उनकी मृत्यु अहमदाबाद में हुए उनकी कब्र भी अहमदाबाद में है। मौलाना कमालुद्दीन अहमदाबाद में दफ़न हैं यहां नहीं। यह तो भारत को अपमानित करने के लिए यहां बनाई गई है। धार एक प्रतिष्ठित स्थान था। राजा भोज ने धार को अपनी राजधानी बनाया था। अब धार की लड़ाई पूरे देश की लड़ाई हे संपूर्ण हिंदी समाज की लड़ाई हे। वर्षों पूर्व भी अमीरुद्दीन नामक मुस्लिम ने पहले भी कोर्ट में अपनी हार देखते हुए कोर्ट से मामला वापिस लिया है। हम पहले भी कोर्ट से जीते हे और आगे भी जीतेंगे।
मां वाग्देवी को न्याय दिलाने के लिए एकत्रित
धर्म सभा को स्वदेशानंद गिरी महाराज ने संबोधित करते हुए कहा कि आज हम यहां मां वाग्देवी सरस्वती को न्याय दिलाने के लिए एकत्रित हुए हैं यह भूमि सनातनियों की है यहां किसी का भी कब्जा नहीं चलेगा यह ऋषियों साधु संतों की भूमि है राजा भोज महाराणा प्रताप, शिवाजी की भूमि है यह कोई अकबर बाबर की भूमि नहीं है। में आज इस मंच से मुस्लिम भाइयों से आह्वान करता हु कि आप भी इसी सनातन की संतान हे मुगलों ने जबरिया धर्म परिवर्तन करा कर मुस्लिम बना दिया है। हम तो आज भी कहते हे कि आप पुनः घर वापसी कर सनातन में आजाओ।
भोजशाला में मां वाग्देवी सरस्वती स्थापित होगी
अवधुत संत नर्मदा नंद जी कहा कि आज सनातन पुनः जागृत हो रहा है आज धार से ये संदेश पूरे विश्व को जाए कि ब्रिटेन में जो प्रतिमा हे पुनः भोजशाला में स्थापित हो हम लोग विश्व का कल्याण चाहने वाले सनातन धर्म को मानने वाले हैं धार में भोजशाला मां वाग्देवी कॉरिडोर के रूप में जानी जाए महाकाल कारीडोर की तरह यहां भी श्रद्धालु दर्शन पूजन करे हम आशा करते हे कि जल्द ही भोजशाला में मां वाग्देवी सरस्वती स्थापित होगी।
भव्य शोभायात्रा में लोगो का सैलाब उमड़ा
सुबह में निकलने वाली शोभायात्रा को लेकर हिंदू समाज के लोग लालबाग में आना शुरू हो गए वहीं लालबाग से मां वाग्देवी की शोभायात्रा में संतों के साथ ही हिन्दू समाज सैलाब के रूप में उमड़ा 20 हजार से अधिकसंख्या में भक्तों की सहभागिता रही । शोभायात्रा बैंड बाजों के साथ नगर के प्रमुख मार्गो से होते हुए भोजशाला पहुंची । यात्रा मार्ग पर अनेक स्थानों पर मंच लगा कर विभिन्न समाज, सामाजिक संगठनों, व्यापारी संगठनों ने पुष्प वर्षा कर ऐतिहासिक भव्य स्वागत किया। शोभायात्रा मोतीबाग चौक पहुंची तो वहां धर्म सभा में परिवर्तित हो गई धर्म सभा के बाद मां वाग्देवी का तेल चित्र लेकर संतो के साथ अतिथि ने भोजशाला में प्रवेश कर गर्भगृह में महाआरती के साथ भक्तों में मां वाग्देवी का पूजन किया।
चप्पे चप्पे पर पुलिस की नजर
भोजशाला और नगर में सुरक्षा के माकूल इंतजाम के बीच प्रवेश की व्यवस्था थी, लोगो की संघन जांच के बाद प्रवेश दिया जा रहा था पुलिस और प्रशासन की और से सुरक्षा को लेकर खासे प्रबंध किए गए थे, मुख्य द्वार पर सीआरपीएफ की कंपनी के साथ पुलिस जवानों की तैनाती थी, ताकि की किसी भी तरह की दिक्कत भक्तों को ना हो। भोजशाला में क्षेत्र में ही कंट्रोल रुम के जरिए सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन की मदद से निगरानी की जा रही थी, पुलिस की चप्पे-चप्पे पर नजर रख रही थी। सुरक्षा के खास इंतजाम के चलते भक्तों को सुरक्षित महसूस कराया जा रहा है।
पीजी कॉलेज में अस्थाई जेल
टकराव की आशंका को देखते हुए विवादों को ध्यान में रखते हुए इस बार पीजी कॉलेज में अस्थाई जेल तैयार की गई थी। विधिक कक्षा संचालित परिसर में तीन बड़े हॉल रिजर्व किए गए थे । 21 से 27 जनवरी तक कॉलेज को अस्थाई जेल के रूप में उपयोग करने के लिखित आदेश जारी हुए हैं।
इनका कहना है
प्रियंक मिश्रा कलेक्टर धार ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय से प्राप्त दिशा निर्देशों के अनुपालन में हिन्दू समाज के नियत स्थान पर सूर्योदय से सूर्यास्त तक निर्विघ्न पूजन और मुस्लिम समाज की नमाज भी नियत किए गए स्थान पर 1 बजे से 3 बजे के बीच निर्विघ्न संपन्न हुई। इसके साथ ही सभी नागरिकों के धैर्य को देखते हुए धन्यवाद देते हुए व्यवस्थाओं में सहयोग के लिए नागरिकों का आभार प्रकट करता हूं ।