
इंदौर। भले ही विकास के दबाव में जंगलों का दायरा सिमटता नजर आता हो, लेकिन वन्य प्राणियों की मौजूदगी के मामले में मध्यप्रदेश एक बार फिर अपनी समृद्ध जैव-विविधता का प्रमाण दे रहा है। आज से प्रदेशभर में बाघ गणना की औपचारिक शुरुआत हो गई है, लेकिन इससे पहले ही इंदौर वन मंडल से मिले संकेत वन विभाग के लिए उत्साहवर्धक हैं।
इंदौर मंडल की 14 बीट में 33 जगह पर बाघों की मौजूदगी के पुख्ता प्रमाण सामने आए हैं। जंगलों में मिले ताजे पंजों के निशान और कैमरा ट्रैप में कैद गतिविधियों ने विभाग का मनोबल बढ़ाया है। डीएफओ प्रदीप मिश्रा ने बताया कि बाघ गणना को लेकर पिछले एक सप्ताह से व्यापक स्तर पर तैयारियां की जा रही थीं। महू, मानपुर और चोरल के जंगलों में करीब 1500 नाइट विजन कैमरे लगाए गए। इंदौर रेंज के डबलचौकी और नाहर-झाबुआ क्षेत्र में भी कैमरा ट्रैपिंग। रिहर्सल के दौरान बाघ, तेंदुआ, चीतल, नीलगाय और भेड़की की मौजूदगी दर्ज हुई। यह संकेत जंगलों के स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र की पुष्टि करते हैं।
क्षेत्रवार प्रारंभिक आंकड़े
चोरल की 33 लोकेशन पर 18 बाघ और 33 तेंदुए के संकेत मिले, जबकि इंदौर रेंज की 26 लोकेशन पर 1 बाघ, 15 तेंदुए के संकेत मिले। इसी तरह महू की 20 लोकेशन पर 2 बाघ और 15 तेंदुए के प्रमाण वन विभाग ने खोजे। मानपुर की 23 लोकेशन पर 10 तेंदुए होने के संकेत प्राप्त हुए। रालामंडल की 1 लोकेशन सिर्फ 1 बाघ होने का पता चला, इस तरह कुल 103 लोकेशन पर 33 बाघ और 74 तेंदुओं के संकेत मिले हैं। वन विभाग का मानना है कि गणना पूरी होने के बाद तस्वीर और स्पष्ट होगी, लेकिन शुरुआती आंकड़े यह दर्शाते हैं कि इंदौर वन मंडल में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में प्रयास मजबूत और प्रभावी हैं।
