
नई दिल्ली । भारतीय मुद्रा रुपया बुधवार को इतिहास में पहली बार अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ₹90 के स्तर के पार चला गया। अंतर-बैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया शुरुआती कारोबार में 89.96 पर खुला, लेकिन कुछ ही मिनटों में बिकवाली के दबाव के चलते ₹90.15 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक फिसल गया। बाद में मामूली सुधार के बाद भी दिन का लेनदेन ₹90.02 प्रति डॉलर पर बंद हुआ, जो पिछले बंद भाव से 6 पैसे नीचे रहा।
रुपया लगातार तीसरे दिन रिकॉर्ड लो लेवल पर गिरा है। मंगलवार को भी यह ₹89.9475 प्रति डॉलर पर गिरकर बंद हुआ था।
रुपया क्यों गिरा? तीन बड़े झटके
विशेषज्ञों के अनुसार रुपये की कमजोरी किसी एक वजह से नहीं, बल्कि कई आर्थिक और भू-राजनीतिक कारणों के संयुक्त असर से उत्पन्न हुई।
US और India ट्रेड डील में देरी से निवेशकों का भरोसा टूटा हैं।
भारत अमेरिका व्यापार समझौते में लगातार अनिश्चितता बनी हुई है।
LKP सिक्योरिटीज के वीपी (रिसर्च) जतिन त्रिवेदी के मुताबिक “मार्केट अब आश्वासन नहीं, ठोस डील चाहता है। समझौते में देरी ने निवेशकों का विश्वास कमजोर किया और डॉलर की मांग बढ़ी।”
विदेशी पूंजी की तेज निकासी
सिर्फ दिसंबर के पहले दो ट्रेडिंग सत्रों में ही विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने
₹4,335 करोड़ के शेयर बेचकर निकासी की
इस साल की शुरुआत से अब तक कुल आउटफ्लो बढ़कर
₹1,48,010 करोड़ रुपये हो चुका है।
चूंकि विदेशी निवेशक निकासी के समय रुपये को डॉलर में बदलते हैं, इसलिए डॉलर की मांग बढ़कर
रुपए पर भारी दबाव डाल रही है।
व्यापार घाटा रिकॉर्ड स्तर पर, सोना इंपोर्ट सबसे बड़ा कारण
अक्टूबर 2025 में भारत का ट्रेड डेफिसिट 41.7 बिलियन डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।
मुख्य कारक • सोने का आयात लगभग तीन गुना बढ़कर 14.7 बिलियन डॉलर
• सोना–चांदी की ऊँची कीमतों से इंपोर्ट बिल में उछाल
• अमेरिकी टैरिफ बढ़ोतरी के कारण अमेरिका को निर्यात में 28% की गिरावट
रुपए पर दबाव क्यों नहीं थमा?
विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने बताया कि
• बैंकों द्वारा उच्च स्तर पर अमेरिकी डॉलर की भारी खरीद
• विदेशी पूंजी निकासी जारी रहना
दोनों ने रुपये पर पकड़ बनाकर रखी। हालांकि
• डॉलर इंडेक्स 0.13% गिरकर 99.22 पर आया
• ब्रेंट क्रूड 62.43 डॉलर/बैरल पर नरम रहा। इन दो कारकों ने तेज गिरावट को कुछ हद तक रोकने में मदद की।
शेयर बाजार पर भी असर सेंसेक्स।निफ्टी लाल निशान में दिखाई दे रहें हैं।
रुपए में गिरावट का दबाव शेयर बाजार की शुरुआत में स्पष्ट दिखा।
सूचकांक गिरावट
सेंसेक्स 165.35 अंक गिरकर 84,972.92
निफ्टी 77.85 अंक गिरकर 25,954.35
सुबह 9:30 बजे तक
सेंसेक्स 250 अंकों से अधिक लुढ़का
निफ्टी 100 अंक से अधिक नीचे ट्रेड कर रहा था
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने मंगलवार को
₹3,642.30 करोड़ के शेयर बेचे, जिससे बाजार में और दबाव बढ़ गया।
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि
रुपये की दिशा अब तीन बातों पर निर्भर करेगी
US–India ट्रेड डील पर स्पष्टता
FPI फ्लो में स्थिरता
कच्चे तेल और सोना आयात के बिल में गिरावट
यदि इनमें सुधार नहीं हुआ तो
डॉलर की मांग बढ़ती रहेगी और रुपया नई कमजोरी की ओर बढ़ सकता हैं।
रुपये के ₹90 के स्तर को छूना सिर्फ सांकेतिक नहीं, बल्कि
विदेशी निवेश
आयात लागत
महंगाई
व्यापार संतुलन
सभी पर सीधा प्रभाव डालने वाला महत्वपूर्ण आर्थिक मोड़ है।