
ग्वालियर/भोपाल। मध्य प्रदेश में आरक्षण के नाम पर एक बड़ा घोटाला सामने आया है। कुछ लोगों ने पढ़ाई के दौरान खुद को ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) बताकर छात्रवृत्ति का लाभ लिया, और नौकरी लगते ही अनुसूचित जनजाति (आदिवासी/ST) का फर्जी जाति प्रमाण-पत्र बनवाकर सरकारी नौकरियां हथिया लीं। इस तरह उन्होंने वास्तविक आदिवासी समुदाय के हक़ पर डाका डाला।
मध्य प्रदेश STF (Special Task Force) की जांच में अब तक 25 से अधिक सरकारी अधिकारी एवं कर्मचारी ऐसे चिह्नित किए जा चुके हैं जिन्होंने फर्जी ST प्रमाण-पत्र के आधार पर नौकरी प्राप्त की। इन सभी के खिलाफ विभिन्न थानों में FIR दर्ज कर ली गई है।
चिह्नित 25 से अधिक आरोपियों के नाम और पद (प्रकाशित सूची के अनुसार):
1. डॉ. दिनेश माझी – जीआरएमसी ग्वालियर
2. डॉ. सीमा बाथम – जीआरएमसी ग्वालियर
3. डॉ. रजनीश माझी – जीआरएमसी ग्वालियर
4. डॉ. विनोद बाथम – जीआरएमसी ग्वालियर
5. डॉ. रेखा बाथम – आयुर्वेदिक कॉलेज, आमखो ग्वालियर
6. डॉ. महेंद्र बाथम – फार्मासिस्ट, शिवपुरी
7. जवाहर सिंह केवट – शिक्षक
8. सीताराम केवट – शिक्षक
9. सरला माझी – शिक्षक
10. कुसुम मांझी – शिक्षक
11. राजेश केवट – शिक्षक
12. बाबूलाल रावत – शिक्षक
13. सुनीता रावत – शिक्षक
14. हेमंत बाथम – आरक्षक, साइबर सेल ग्वालियर
15. गीतिका बाथम – एसआई, पुलिस मुख्यालय भोपाल
16. लोकेंद्र बाथम – 25वीं बटालियन, भोपाल
17. महेश बाथम –u आरक्षक, शिवपुरी
18. नाहर सिंह – आरक्षक, शिवपुरी
19. अनिल बाथम – सूबेदार, यातायात पुलिस श्योपुर
20. भागीरथी माझी – स्टेनो, गुना
21. अनुपम मांझी – स्टेनो, गुना
22. देवीलाल ढीमर – स्टेनो, राजगढ़
23. दशरथ रावत – शिक्षक, गुना
24. मनीष गौतम – महाप्रबंधक, बिजली कंपनी, बैतूल
25. हाकिम बाथम – जेई, बिजली कंपनी, होशंगाबाद
26. यश कुमार सिंह – संयुक्त संचालक, उद्यान विभाग, दमोह
इनकी असल जाति ?
जांच में पाया गया कि ये सभी मूल रूप से ओबीसी समाज (मुख्यतः केवट, बाथम, माझी, रावत, ढीमर आदि) के हैं, जो मध्य प्रदेश में OBC श्रेणी में आते हैं। इनमें से अधिकांश ने पढ़ाई के समय OBC प्रमाण-पत्र बनवाकर सरकारी छात्रवृत्ति का लाभ लिया, लेकिन नौकरी के लिए फर्जी तरीके से ST (गोंड, कोल, भील आदि) प्रमाण-पत्र तैयार करवाया।
अभी तक विभागों ने कोई कार्रवाई नहीं की
FIR होने के बावजूद संबंधित विभागों ने इनकी सेवा समाप्ति या निलंबन जैसी कोई कार्रवाई अभी तक नहीं की है। कई आरोपी वर्षों से नौकरी कर रहे हैं।
डीएड फर्जी अंकसूची मामला भी गर्म
इसी बीच STF ने डीएड की फर्जी मार्कशीट लगाकर शिक्षक बने लोगों की जांच में 16 और नाम जोड़े हैं। पहले 8 नामजद थे, अब कुल 24 से अधिक शिक्षक इस घोटाले में फंसे हैं।
STF का बयान
STF के SP राजेश सिंह भदौरिया ने कहा,
“जो लोग सत्यापन प्रक्रिया में शामिल थे, उनके नाम भी FIR में जोड़े जा रहे हैं। फर्जी प्रमाण-पत्र बनाने व सत्यापन करने वाला पूरा नेटवर्क बेनकाब किया जाएगा।”
यह मामला मध्य प्रदेश में आरक्षण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। आने वाले दिनों में और भी नाम सामने आने की संभावना है।